सतना नगर निगम की एमआईसी बैठक में कुत्तों के बधियाकरण और टीकाकरण पर प्रति कुत्ता 980 रुपये खर्च तय किया गया। साथ ही निर्माण कार्य, नामकरण और अन्य विकास प्रस्तावों को मंजूरी मिली।
सतना नगर निगम में नारी शक्ति वंदन अभियान के तहत पार्षद प्रीति कुशवाहा को एक दिन के लिए स्पीकर बनाया गया। महिला आरक्षण, स्थानीय मुद्दों और परिषद की बहसों ने चर्चा को नई दिशा दी।
सतना नगर निगम ने संबल योजना में अपात्र होकर लाभ लेने वाले तीन हितग्राहियों पर एफआईआर की तैयारी की है। मृतकों के बाद पंजीयन और उम्र छुपाकर सहायता राशि लेने का मामला सामने आया।
सतना नगर निगम में बिना टेंडर दुकानों के आवंटन मामले में सहायक आयुक्त पर एफआईआर की प्रक्रिया सवालों में है। चार दिन में चिट्ठी कोतवाली नहीं पहुंचने से प्रशासनिक गंभीरता पर उठे सवाल।
सतना नगर निगम में बजट को लेकर महापौर और कमिश्नर के बीच टकराव गहराया है। समयसीमा नजदीक होने के बावजूद बजट पास नहीं हो सका, जिससे विकास कार्य प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
सतना में नगर निगम कर्मचारियों पर फुटपाथ और सड़कों पर अवैध रूप से दुकानें सजवाने और बदले में 500 रुपए वसूलने के आरोप लगे हैं। रीवा-पन्ना मार्ग, बिरला रोड और अन्य व्यस्त रूटों पर दुकानों से बाजार बैठकी वसूली जा रही है। सहायक राजस्व अधिकारी के हस्ताक्षर वाली रसीदें मिलीं, जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए।
सतना स्मार्ट सिटी योजना के तहत कोठी तिराहे पर करोड़ों रुपए खर्च कर बनाई गई सब्जी मंडी अब शराबियों और असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुकी है। चबूतरों पर सब्जियों की जगह शराब और गांजे का सेवन होता है, जबकि दुकानदार सड़कों पर दुकानें लगाने को मजबूर हैं।
सतना नगर निगम में चौराहों के सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की टीम ने दस्तावेजों का सत्यापन कर भ्रष्टाचार की जांच तेज कर दी है। अब तक करीब 25 लाख की गड़बड़ी पकड़ी गई है और 10 लोगों पर धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज हुआ है।
सतना नगर निगम में सीएम हेल्पलाइन की 1228 शिकायतें अब भी लंबित हैं, जिनमें से 830 शिकायतें केवल जुलाई माह की हैं। इनमें कई शिकायतें 500 से 1000 दिनों से अटकी हैं। हर सप्ताह समीक्षा के बावजूद समाधान की गति धीमी है, जिससे नागरिकों की समस्याएं बनी हुई हैं। क्या प्रशासनिक लापरवाही इसके लिए ज़िम्मेदार है?
सतना और रीवा नगर निगम की राजनीति अक्सर जनप्रतिनिधियों के करियर की अंतिम सीढ़ी बनकर रह जाती है। जिले में अब तक कोई भी महापौर विधानसभा या लोकसभा तक नहीं पहुंच सका। इसके उलट, जिला पंचायत से निकलकर कई नेता विधायक-सांसद बने। सवाल है — क्या योगेश ताम्रकार, राजेश पालन और अजय मिश्रा इस ट्रेंड को बदल पाएंगे?






















